संताल नृत्य
संताल भी मुंडा कूल से ही आते हैं। यह अप्रिय परिवर्तन सबसे बड़। अंग है । भाषा -संस्कृति पर्याप्त समानताओं के होते हुए भी इनमें मौलिक भेद है। नृत्य संगीत में किंचित परिवर्तन स्पष्टदिखाई पडता है । इनके नृत्य भी सालों भर ऋतु परिवर्तन के साथ पर्व-उत्सवों के अनुसार चलते रहते है। इनके मुख्या नृत्य है … डाहर, दोह, दोंगेर, आषाढ़रिया , शिकारी, दनस्य,सोहराई ,दोसमी, सकरात आदि | इनके नृत्य भी आकर्षक , सुन्दर, मनोहर, और दिलकश होते है |